*क्या यही है अभिव्यक्ति की आज़ादी ?*

शब्द,जहर जो धोल रहे,

राग-द्वेष जो दे रहे,

अमन-चैन और भाईचारा,

सब कुछ हमसे छीन रहे,

क्या यही है अभिव्यक्ति की आज़ादी ?

शब्द, जो हृदय को छेद रहे,

देश को खण्डित कर रहे,

सच को झूठ, झूठ को सच ;

साबित कर डंका पीट रहे,

क्या यही है अभिव्यक्ति की आजादी ?

जहाँ दायित्व का बोध नहीं,

हिंसा, वैमनस्यता, भड़ास निहित हो,

विध्वंसवाद शब्दों में लेकर,

अभिव्यक्ति बस हथियार बना हो,

क्या यही है अभिव्यक्ति की आजादी ?

जहाँअनुचित शब्द प्रहार बने हो,

विरोध, अहित और स्वार्थ लिप्त हो,

जहाँ मर्यादा मुख मोड़ गई हो,

क्या यही है अभिव्यक्ति की आज़ादी ?

‘बोल’ जो बोले जनहित को,

राष्ट्रप्रेम, समन्वय निहित हो,

संप्रभुता स्वछंद बनी हो,

अखण्ड, एकता प्रेम बना हो,

कोटि नमन ऐसी अभिव्यक्ति को,

कोटि नमन ऐसी अभिव्यक्ति को ।

स्वरचित- अनिल बिष्ट (कफोला )@copyright.